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Monday, April 9, 2012

घर घर पहुंची पोर्नोग्राफी

एक अलसाई सी सुबह थी,
आँख  पूरी तरह  से  खुली भी नहीं थी! 
दरवाजे पर कुछ सरसराहट का स्वर आया, 
देखा ,अख़बार वाले ने अखबार सरकाया था! 
जैसे ही अखबार उठाने चला,
जोर का झटका लगा ,
नहीं  नहीं कोई दुर्घटना नहीं घटी थी
बात दरअसल यह है कि
अखबार के ऊपर पत्रिका इंडिया टुडे पड़ी थी 
और उसके कवर पेज  पर,
एक लड़की अधूरे वस्त्रों में खड़ी थी ,
ये तो बाद में पता चला उसकी तो  यूनीफॉर्म ही वही थी
मुहँसे निकला इट्स नॉट फेयर
अबे इंडिया टुडे है की डेबोनेयर!!

 पत्रिका पर लिखा था ----
दबे पाँव आपके घर घुसा पोर्न
मैंने कहा -ठीक ही है गुरु  क्या गजब ढाये हो ,
दबे पाँव ही तो आये हो
कवर पर सुश्री सनी लियोनि छाई  थी
कमबख्त दबे पाँव ही तो घुस पाई थी

मेरे लिए तो समस्या थी बड़ी  ,क्या बताएं ,
इस पत्रिका को घर में कहाँ रखे कहाँ छिपायें
घर में सत्तर वर्षीया पिता जी और  दो छोटे छोटे  चंगु मंगू
कबख्त पत्रिका देखते ही कहेंगे -हे राम नंगू नंगू
जब कोई जगह इन चंगु मंगू से महफूज नहीं दिखी
पत्रिका हमने गाडी में धर दी

पर , कहते हैं होइए वही जे राम रची रखा-
सारी योजना रह  गयी धरी की धरी
मेरी अनुपस्थ्ती में ,
श्रीमती जी गाडी ले कर चल दी
मैं निर्दोष  परिस्थिति से अनजान बैठा था
फटाक की आवाज हुई,श्रीमती जी ने पत्रिका मुझ पर फेका था
बोली- साहित्य मे रूचि रखते हो
और  गाडी में ऐसी पत्रिका पढ़ते हो
मुझसे तो बात ही  मत करना
अपनी सफाई बच्चो के आगे ही देना !

क्या कहूँ -बड़ी मनहूस घड़ी  थी,
फेकी हुई पत्रिका टेबल पर ही पड़ी  थी!
दुर्गति कुछ और होनी थी बाकी ,
पिता जी आये पत्रिका हाथो में उठा ली! ,
"घर घर पहुंची पोर्नोग्राफी" !
पत्रिका की पंक्तियों को दोहराया ,
और प्रश्न उठाया बोले -ये पोर्नोग्राफी क्या चीज है ?
मैंने कहा पता नहीं पढ़ कर बताऊंगा ,
वो बोले -पैसे लुटाते हो,
पत्रिका अगर पढ़ नहीं  सकते ,
तो फिर क्यों मंगाते हो !!

मैं अवाक् ,निःशब्द निरुत्तर ही रहा! जी में आया कह दू  साहित्य  की नाजायज औलाद है पोर्नोग्राफी पर संकोच वश कह नहीं सका! दो पीढियों के बीच खड़ा मैं सोच रहा  हूँ पिता पुत्र लाख मित्रवत हो कुछ विषय शेयर नहीं किये जा सकते !परिवार में पढ़ी जाने वाली पत्रिकाओं में ऐसी सामग्रियों को कवर पर छापने का क्या तुक है?मुझे लगता है पत्रिकाओ को भी A  और U का प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य कर देना चाहिए ताकि  U  श्रेणी की पत्रिका  A श्रेणी में सेंध न मार सके !

पोर्नोग्राफी के लिए यूं तो मैंने घर के सारे खिड़की दरवाजे बंद कर रखे थे पर कुछ सुराख़ रह गए जिन्हें मैं बंद नहीं कर पाया ! सोचता हूँ कौन बंद कर पायेगा , जब आज हर हाथ में मोबाइल है और मोबाइल में इन्टरनेट ...                    .....,,,.....                                                                                                                                             ब्रजेश