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Thursday, July 11, 2013

हिंदी साहित्य की जय हो !

कल शाम से ही मन में अजीब सी हलचल मची थी ,मचनी ही थी , दुःख जैसे विषय पर एक नहीं दो दो कवितायेँ पढ़ ली!इनमे एक कविता में कवि का  दुःख शायद कुछ तरल रूप में था आंसुओ के बहाव में बह जा रहा था वहीँ दूसरी कविता में कवि का  दुःख कुछ ठोस रूप में था और आँसुओं के बहाव में बह नहीं पा रहा था!अजीब सी बात थी दुःख जैसी चीज भी दो फ्लेवर में दिख रही थी ! मेरी स्थिती  प्राइमरी स्कूल के उस अमेधावी छात्र की तरह थी जिसे क्लास में कुछ भी समझ  नहीं आता पर मार के डर  से वह सब रट  जाता है ! साहित्य में दुःख का अपना दबदबा होता है  इसके  बगैर साहित्य की कल्पना करना मूर्खता है ! दुःख और आँसू साहित्य के महासागर है जिसमे साहित्य की रचनाये तैरती है !

साहित्य से दुःख उपजा है या दुःख से साहित्य यह विद्वान लोगो के चिंतन का विषय है ! हम जैसे लोगो के चिंतन का विषय टमाटर, आलू ,दाल ,चावल ,कपडे लत्ते , जूते,  चप्पल ,स्कूल की फीस, दवाईयां ,है ! यह विषय भी हमें हमारी श्रीमती जी ही  उपलब्ध कराती है !हमारे विषयों के चरित्र नहीं बदलते !अगर टमाटर मुझे टीस  दे रहा है तो आपको भी देगा मगर साहित्य के विषय अनोखे होते है दुःख में आनंद और आनंद में दुःख का स्वाद आ जाता है आइसक्रीम में चाउमीन और चाउमीन में आइसक्रीम की शीतलता का आनंद आ जाता है !चाउमीन का  प्रयोग , या यों कहे घुसपैठ  हिंदी कविता  में हुआ है या नहीं मालूम नहीं , पर उम्मीद है जल्दी ही  हो जयेगा , ऐसा आम जीवन में चीनी उत्पादों की घुसपैठ देख कर विश्वास से कह रहा हूँ !

चीन स्वाभाव से ही घुस पैठी है और हम विशाल ह्रदय खुले द्वार !हम अपने देश की सीमा में उसके घुसपैठ का बुरा नहीं मानते आखिर  चीन विश्व राजनीति का महाबली हैअत: हमारी सरकारे उनका पूरा सहयोग करती हैं ! टीवी न्यूज़ में दिखा की कैसे  चीनी सेना ने लद्दाख के चुनार इलाके  में घुस कर् हमारे  बंकर  नष्ट किये और हमारी सेना  द्वारा लगाये गए कैमेरो के तार  को न सिर्फ़ काटा  बल्कि उखाड़  कर साथ भी ले गए!  चौकाने वाली बात यह की चीनी सेना ने स्थानीय लोगों  को हिंदी में जगह खाली  करने की धमकी दी !

आदतन हम इस पूरी घटना को तनावपूर्ण नहीं मान रहे है क्युकि  चीन ने अपने महाबली होने के धर्म का पालन किया है और हमने उन्हें सहयोग कर एक नेक काम किया है चीन भी खुश हम भी खुश ! इस पूरी घटना को एक बड़ी उपलब्धी के रूप में देखा जाना चाहिए !महबलि चीनी सैनिक हिंदी बोल रहे हैं मैं    तो कहता हूँ की हमें मारे  प्रसन्नता के फूल जाना चाहिए हमारा साहित्य कब फला फूला  और चीन पहुँच गया हमें पता ही नहीं चला ! हमारे सैनिको का सीना चौड़ा हो न हो हमारे साहित्यकारों की छाती गर्व से जरूर फूलनी चाहिए आखिर उन्होंने कलम तोड़ मेहनत  कर हिंदी को चीन तक पहुंचा दिया ! पहली बार चीन को भी हमारे कैमरे पसंद आये और वह ले गया वैसे भी  महाबली संस्कृति में पैसे देने का रिवाज  कहाँ होता है !

सही   मायनो  में हिंदी चीनी भाई भाई कहने का वक्त अब आया है !वो दिन दूर नहीं जब चंदा मामा पुए छोड़ कर    मोमोज   पकाएंगे और माताएं तो रोटी छोड़ मैगी और चाउमिन बनाने ही लगी हैं अपने लाडलो के लिए !कुल मिला कर  अगर चाहे तो उसके लिए यह चिंता और साहित्यकारों के लिए यह परम सौभाग्य परम उपलब्धि की बात है ! जन मानस के लिए इसमें कुछ भी नहीं है ! हमारे लिए यह व्यर्थ का चिंतन है क्युकि  यह हमारे चिंतन के विषयो यथा टमाटर आलू ,प्याज आदि को कही से भी प्रभावित नहीं करते हैं !
                                                                                                                  ब्रजेश 

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